नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर, गोकुलपुरी, शिव विहार और आसपास के घनी आबादी वाले इलाकों में वर्षों से लोगों की सबसे बड़ी समस्या बने ट्रैफिक जाम से जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है। दिल्ली सरकार ने करावल नगर–गोकुलपुरी ड्रेन (नाले) के ऊपर फ्लाईओवर बनाने की संभावना तलाशने के लिए फिजिबिलिटी स्टडी (व्यवहार्यता अध्ययन) कराने की तैयारी शुरू कर दी है। यदि अध्ययन में परियोजना व्यवहारिक पाई जाती है तो इस कॉरिडोर पर फ्लाईओवर निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा।
मिली जानकारी के अनुसार, करावल नगर और गोकुलपुरी ड्रेन के दोनों ओर बसे इलाकों की आबादी लगातार बढ़ने के कारण यहां की सड़कें ट्रैफिक का दबाव नहीं झेल पा रही हैं। रोजाना हजारों वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं, जिससे सुबह और शाम के समय लंबा जाम लगना आम बात हो गई है।
सिर्फ 25–30 फीट चौड़ी सड़क पर भारी ट्रैफिक
अधिकारियों के अनुसार, करावल नगर ड्रेन लाल बाग सब्जी मंडी से शुरू होकर आगे गोकुलपुरी ड्रेन में मिलती है, जबकि गोकुलपुरी ड्रेन आगे शाहदरा ड्रेन में जाकर मिलती है। दोनों ड्रेन को मिलाकर यह कॉरिडोर करीब 7 से 8 किलोमीटर लंबा है और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सबसे व्यस्त क्षेत्रों से होकर गुजरता है।
बताया जा रहा है कि गोकुलपुरी ड्रेन की वास्तविक चौड़ाई करीब 200 फीट है, लेकिन वर्षों से हुए अतिक्रमण के कारण इसकी उपयोगी चौड़ाई घटकर लगभग 25 से 30 फीट रह गई है। करावल नगर ड्रेन की स्थिति भी लगभग ऐसी ही है। ड्रेन के दोनों ओर बनी संकरी सड़कों पर पूरे क्षेत्र का ट्रैफिक चलता है, जिसके कारण रोजाना भारी जाम की स्थिति बनती है।
कैटरपिलर (पिलर आधारित) फ्लाईओवर पर विचार
सरकार शुरुआती स्तर पर ऐसी योजना पर विचार कर रही है, जिसमें ड्रेन के ऊपर पिलर आधारित (कैटरपिलर) फ्लाईओवर बनाया जाए। इससे नीचे ड्रेन का कार्य और ऊपर यातायात दोनों सुचारु रूप से संचालित हो सकेंगे। फिलहाल इस प्रस्ताव की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए फिजिबिलिटी स्टडी कराई जाएगी।
लाखों लोगों को होगा फायदा
यदि यह परियोजना मंजूर होती है तो करावल नगर, गोकुलपुरी, शिव विहार, गंगा विहार, इंदर एन्क्लेव सहित आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लाखों लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही शाहदरा जीटी रोड, वजीराबाद रोड और अन्य प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की भी संभावना है।
फिलहाल परियोजना प्रारंभिक चरण में है और फिजिबिलिटी स्टडी की रिपोर्ट आने के बाद ही फ्लाईओवर के निर्माण को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
